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विश्व जनसंख्या दिवस 2018 की पूरी जानकारी | WORLD POPULATION DAY

Written by A to Z Classes

विश्व जनसंख्या दिवस 2018 की पूरी जानकारी | WORLD POPULATION DAY Video

  • प्रत्येक वर्ष आज, यानि की 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है.
  • इसका मुख्य उदेश्य हर सेकंड बढ़ रही आवादी के मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है.
  • विश्व जनसंख्या दिवस भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनसंख्या भारत की सबसे बड़ी समस्या है. आंकड़ों की मानें तो केवल भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं.
  • ये आंकड़े सिर्फ हॉस्पिटल में जन्मे बच्चों का है.
  • इसी तरह सब कुछ चलता रहा तो 2030 तक भारत विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जायेगा.
  • अभी भारत चीन के बाद दुसरे स्थान पर है.
  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की शासी परिषद द्वारा पहली बार 1989 में मानाने की शुरुआत हुई.
  • वर्तमान में दुनिया की आबादी लगभग साढ़े 7 अरब है. लेकिन 11 जुलाई, 1987 को जब यह आंकड़ा 5 अरब हुआ था तो लोगों के बीच जनसंख्या संबंधी मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए विश्व जनसंख्या दिवस की नींव रखी गई
  • इस दिवस को मनाए जाने का सुझाव डॉ के सी ज़कारिया ने दिया था. जब दुनिया के आबादी ने 5 अरब के आंकड़े को छुआ तब उस वक्त वह विश्व बैंक में कार्यरत थे. क्रोएशिया के ज़ाग्रेब के माटेज गास्पर को दुनिया का 5 अरबवां व्यक्ति माना गया.
  • बता दें कि पहले इसे ‘फाइव बिलियन डे’ माना गया लेकिन बाद में यूएनडीपी ने इसे विश्व जनसंख्या दिवस घोषित कर दिया.
  • सेमिनार, चर्चा, शैक्षिक प्रतियोगिता, शैक्षणिक जानकारी सत्र, निबंध लेखन प्रतियोगिता, विभिन्न विषयों पर लोक प्रतियोगिता, पोस्टर वितरण, गायन, खेल क्रियाएँ, भाषण, कविता, चित्रकारी, नारें, विषय और संदेश वितरण, कार्यशाला, लेक्चर, बहस, गोलमोज चर्चा, प्रेस कॉन्प्रेंस के द्वारा खबर फैलाना, टीवी और न्यूज चैनल, रेडियो और टीवी पर जनसंख्या संबंधी कार्यक्रम के द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस का प्रचार किया जाता है और जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है.
  • इस दिन के जरिए लोगों का ध्यान प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी दिलाना है क्योंकि खराब स्वास्थ्य दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण है.
  • इस दिन के जरिए लोगों का ध्यान प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी दिलाना है क्योंकि खराब स्वास्थ्य दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण है.
  • ये लड़का और लड़की दोनों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिये मनाया जाता है।
  • अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह समझने के काबिल होने तक शादी को रोकना तथा लैंगिकता संबंधी पूरी जानकारी देना।
  • तर्कसंगत और युवा अनुकूलन उपायों के द्वारा अनचाहे गर्भ से बचने के लिये युवाओं को शिक्षित करना चाहिये।
  • समय से पहले माँ बनने के खतरे को लेकर लोगों को शिक्षित करें।
  • विभिन्न इंफेक्शन से बचने के लिये यौन संबंधों के द्वारा फैलने वाली बीमारियों के बारे में उनको बताना
  • लड़कियों के अधिकारों को बचाने के लिये कुछ असरदार कानून और नीतियों की माँग हो।
  • साल 2018 का विषय ‘परिवार नियोजन: एक मानवाधिकार‘ है.
  • क्योंकि यह परिवार नियोजन को पहली बार मानवाधिकार का दर्जा देने वाली तेहरान घोषणा की 50वीं वर्षगांठ का वर्ष है. पहली बार 1968 में ‘मानवाधिकार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन’ में परिवार नियोजन को भी एक मानवाधिकार माना गया और अभिभावकों को बच्चों की संख्या चुनने का अधिकार दिया गया.
  • पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था कि दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और उनमें भी ज्यादातर गरीबी की हालत में गुजर बसर करते हैं. मानव विकास में यह असमानता ही दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता और कई बार हिंसा का कारण बनती है.

WORLD POPULATION DAY Video

Best Question and Answers From Quora about World Population Day

Question 1 – What are the problems which we need to face if the world population increases day by day?

Best Answer – 

  • There are many problems due to human overpopulation.
  • Insufficient water for drinking and sewage treatment. The availability of fresh water is limited in the planet. With more population, its availability is more scarce.
  • Depletion of natural resources – forests, trees, minerals, oil, gas etc.
  • Increase in many types of pollution – water, air, noise and soil pollution.
  • Global warming due to the ways of living of the people.
  • Animals extinction or significant reduction in their numbers.
  • Unhygienic living condition due to excessive resource consumption.
  • Impact on the social situation of the population – increased the crime rate, conflicts due to the scarcity of resources.
  • Political disputes between countries due to clash for resources.
  • In the middle east, there have been conflicts and even wars due to lack of resources – water.

 

Question 2 -Is there any point in individuals being “green” when the world population grows by ~200,000 every day?

Answer- 

  • Yes, there is absolutely purpose and impact by making sustainable choices as an individual.
  • First, the impacts we as human have on our ecosystem, whether good or bad, are nothing more than the aggregate of the choices we all make as individual humans in our day-to-day lives at home, work, and within organizations, we belong.  So if we as individuals choose poorly, we are directly contributing to making our collective impacts worse – if we choose thoughtfully we are directly contributing to making an improvement.  Just because we are one of 5 billion does not mean we are exempt from our share of the impact.
  • Secondly – the choices we make have ripple effects.  We teach our kids, we influence our friends and family, we set examples in our social groups and communities based on what we choose to do and how we choose to live.  That is true whether you choose poorly or thoughtfully.
  • Most importantly, living in line with your values and level of awareness is a way of being that brings a higher quality of life.  You are aware of the negative impacts of some things.  For you to choose to not incorporate that knowledge in the choices you make in your day to day life brings cognitive dissonance.  Choosing to live in line with your values and awareness may not always be easy, but it does bring about a high sense of living life with a true integrity and ultimately that brings more joy.

#World Population Day in Hindi

विश्व जनसंख्या दिवस का थीम

  • 2015 का थीम था “आपातकाल में अतिसंवेदनशील जनसंख्या”।
  • 2014 का थीम था “जनसंख्या प्रचलन और संबंधित मुद्दे पर चिंता के लिये एक
  • समय” और “युवा लोगों में निवेश करना”।
  • 2013 का थीम था “किशोर पन में गर्भावस्था पर ध्यान”।
  • 2012 का थीम था “जननीय स्वास्थ्य सेवा के लिये विश्वव्यापी पहुँच”।
  • 2011 का थीम था “7 बिलीयन कार्य”।
  • 2010 का थीम था “जोड़े जाओ: कहो क्या चाहिये तुम्हे”।
  • 2009 का थीम था “गरीबा से लड़ो: लड़कियों को शिक्षित करो”।
  • 2008 का थीम था “अपना परिवार नियोजन करो: भविष्य नियोजन करो”।
  • 2007 का थीम था “मनुष्य कार्य पर है”।
  • 2006 का थीम था “युवा होना कठिन है”।
  • 2005 का थीम था “समानता से सशक्तिकरण”।
  • 2004 का थीम था “10 पर आईसीपीडी”।
  • 2003 का थीम था “1,000,000,000 किशोरवस्था”।
  • 2002 का थीम था “गरीबी, जनसंख्या और विकास”
  • 2001 का थीम था “जनसंख्या, पर्यावरण और विकास”।
  • 2000 का थीम था “महिलाओं का जीवन बचाना”।
  • 1999 का थीम था “6 बिलीयन के दिन से गिनना शुरु करें”।
  • 1998 का थीम था “आनेवाला 6 बिलीयन”
  • 1997 का थीम था “किशोर जननी स्वास्थ्य देख-रेख”।
  • 1996 का थीम था “जननीय स्वास्थ्य और एड्स”।

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