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नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2025: आज से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आयकर (Income Tax) से जुड़े कई नए नियम भी लागू हो गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2025-26 में की गई घोषणाएं आज से प्रभावी हो चुकी हैं, जिसका सीधा असर करदाताओं की जेब पर पड़ेगा। खास तौर पर नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को चुनने वाले लोगों के लिए यह साल बड़ी बचत लेकर आया है। आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या-क्या बदलाव आए हैं और इनका आपके जीवन पर क्या प्रभाव होगा।
नई कर व्यवस्था में टैक्स स्लैब में बदलाव
नई कर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब में संशोधन किया गया है। अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले व्यक्तियों को कोई टैक्स नहीं देना होगा। पहले यह सीमा कम थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर करदाताओं को राहत दी गई है। इसके अलावा, विभिन्न आय स्तरों पर टैक्स दरों को भी सरल और कम किया गया है, ताकि लोगों के पास अधिक डिस्पोजेबल आय (खर्च करने योग्य आय) बचे। यह कदम खपत को बढ़ाने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में उठाया गया है।
किराये की आय पर छूट की सीमा बढ़ी
अगर आप किराये से आय कमाते हैं, तो आपके लिए भी अच्छी खबर है। किराये की आय पर छूट की सीमा को अब बढ़ाकर 6 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। इससे मकान मालिकों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा और शहरी क्षेत्रों में किराये के बाजार को प्रोत्साहन मिलेगा। यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो अपनी संपत्ति से अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं।
स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन
नए नियमों के तहत स्टार्टअप्स को भी बड़ी राहत दी गई है। 1 अप्रैल 2030 से पहले शुरू होने वाले स्टार्टअप्स को अपने मुनाफे पर 10 साल में से 3 साल के लिए 100% टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। यह कदम उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जिससे भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम और मजबूत हो सके।
टीडीएस और टीसीएस नियमों में ढील
टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) और टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। सेक्शन 206AB और 206CCA को हटाने से टैक्स कटौती करने वालों और जमा करने वालों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। इससे कारोबारियों को राहत मिलेगी और टैक्स प्रक्रिया और सरल होगी।
डिजिटल सर्च और जब्ती के नए अधिकार
आयकर विभाग को अब डिजिटल सर्च और जब्ती के लिए नए अधिकार दिए गए हैं। नए आयकर बिल 2025 के तहत, टैक्स अधिकारी ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट्स, ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स तक पहुंच सकते हैं। यह कदम टैक्स चोरी और काले धन के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह आम करदाता के खिलाफ नहीं, बल्कि टैक्स चोरी रोकने के लिए है।
पुरानी बनाम नई व्यवस्था: क्या चुनें?
नई कर व्यवस्था में छूट और कटौतियां नहीं मिलतीं, लेकिन टैक्स दरें कम हैं। वहीं, पुरानी व्यवस्था में सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपकी आय में निवेश और छूट का हिस्सा कम है, तो नई व्यवस्था आपके लिए बेहतर हो सकती है। लेकिन अगर आप टैक्स बचाने के लिए निवेश करते हैं, तो पुरानी व्यवस्था चुनना फायदेमंद रहेगा।
करदाताओं के लिए सलाह
1 अप्रैल से लागू इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए करदाताओं को अपनी वित्तीय योजना नए सिरे से तैयार करनी चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अपनी आय और खर्च के आधार पर सही टैक्स रीजीम चुनें और समय पर जरूरी कदम उठाएं।
नए नियमों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाना है। यह देखना बाकी है कि ये बदलाव कितने प्रभावी साबित होते हैं और करदाताओं को कितनी राहत मिलती है।